यदि द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी और उसके सहयोगियों की जीत होती तो भारत पर आज किसका शासन होता?

सेकंड वर्ल्ड वॉर में जर्मनी और उसके सहयोगियों की जीत होती तो भारत का भविष्य बाद पहले विजेता जर्मनी और सहयोगी इटली और जापान, अगर इस युद्ध में होते तो शायद कई वर्षों/दशकों तक पूरे यूरोप में हिटलर की नाज़ी पार्टी का झंडा लहराता।

यूरोप से तो यहूदियों का नामोनिशान ही मिट गया होता।

इस हार के बाद आर्थिक रूप से कमज़ोर हो कर अंग्रेज़ तो वैसी भी भारत छोड़ दिए होते और उस समय भारत में भी अंग्रेजों के ख़िलाफ़ आंदोलन तेज़ी से शुरू हो गए थे, इसलिए भारत को आज़ादी तो मिलनी तय थी।

ताकतवर जपान
द्वितीय विश्व युद्ध के समय जापान भी बहुत ताकतवर देश था, उस समय चीन की 30%–40% ज़मीन में जापान का कब्ज़ा था।

यहां तककि कोरिया, फिलीपींस, इंडोनेशिया और बर्मा (म्यांमार) भी जापान के गुलाम देश थे। 

 विश्व युद्ध में अगर जापान की जीत होती तो शायद स्वतंत्र भारत का पहला युद्ध चीन/पाकिस्तान से नहीं बल्कि जापान से होता!

यह बात सच है कि जापान ने भारत में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ़ लड़ने में सुभाष चंद्र बोस जी और आज़ाद हिंद फौज की मदद की थी,

पर इस मदद के पीछे जापान का भी एक अपना फ़ायदा था,

द्वितीय विश्व युद्ध में जापान और ब्रिटेन आपस में दुश्मन थे, जापान भी चाहता था कि किसी तरह भारत जैसे अन्य देशों से अंग्रेजों का राज ख़त्म हो जिससे की अंग्रेज़ विश्व युद्ध में कमज़ोर पड़ जाएं।

जापान को भारत के गुलाम लोगों से कोई सहानुभूति नहीं थी, और उस समय जापान की सोच आज के चीन की तरह विस्तारवादी थी।

म्यांमार तक जापान का कब्ज़ा था, अगर जापान विश्व युद्ध ना हारा होता और अंग्रेज़ भारत छोड़ दिये होते (आज़ादी मिल गयी होती) तो मौके का फ़ायदा उठा के जापान तुरंत स्वतंत्र भारत पर हमला करता।

सुभाष होते पहले प्रधानमंत्री !  सुभाष चन्द्र बोस जी 1945 में गायब ना हुए होते और वो देश के प्रधानमंत्री बन गए होते, तो शायद जापान भी भारत पर हमला करने से पहले दस बार सोचता।


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