दोनों विश्व युद्ध में हारा कौन?
जितनी बार महायुद्ध हुआ, जर्मनी हरेक बार हारा है ।
वे वीर है, उनमे सबकुछ है, परन्तु मित्र नहि है । और अहंकार है ।
उसी अभिमान और अहंकारले बलबूते पर जितनी बार गिरा, हर एक बार पुनः खडा हुआ ।
जर्मनी जैसा अन्दर से बलबान दूसरा कोही नहि है ।
पराजित जर्मनी पर कई पेनाल्टी लगी । प्रधम विश्व युध्द के कारण पराजय के बाद जर्मनी के मन्त्रियो पर वर्साई सन्धि के लिए जाते समय सडे अन्डे फैकै। राईन छेत्र पर अपना अधिकार किया । कई पेनाल्टी लगाई । 1933 हिटलर जर्मनी का चान्सलर बना ।1934 मे प्रेसीडेन्ट मरबा कर सर्वेसर्वा बना ,उसने वैग्यानिको से अविष्कार करवा सैन्यशक्ति बढाई यहा तक otto haan से परमाणु बम भी बनबा लिया था जो उसने ईसकी शक्ति समझ छिपा लिया। हिटलर की गलती रूस पर इग्लैन्ड के पहले चढाइ करना है।
जर्मनी ने जब तक रूस पर आक्रमण नहीं किया था तब तक वो मजबूत स्थिती में था। रूस पर आक्रमण करके उसने दो तरफा मोर्चा खोल दिया। सोवियत रूस के कड़े मुकाबले और कड़ाके की ठंड ने जर्मनी को परास्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जो सिलसिलेवार यूँ है:-
1.जब तक रूस युद्ध में शामिल नहीं हुआ था, हिटलर हर मोर्चे पर जीत रहा था। इंग्लैंड को छोड़कर पूरा यूरोप नाजी सेना के कब्जे में था।
2.उत्तरी अफ्रीका का एक बड़ा क्षेत्र जर्मनी और इटली के अधिकार में था।
3.उनका एक और दोस्त जापान, दक्षिण-पूर्व एशिया में कहर ढा रहा था,अंग्रेजो को खदेड़ दिया गया था।
परंतु इसी समय हिटलर की मति भ्रस्ट हो जाती है, और वह सोवियत यूनियन पर हमला कर देता है, यही से समय का पहिया उल्टा घूमना शुरु हो जाता है, शुरू में तो जर्मन्स आसानी से मॉस्को की ओर बढ़ते हैं।
पर यह रूस की पुराणी युद्ध कला है, कि दुशमन को अपने इलाके में घेर कर मारना जैसा उन्होंने नेपोलियन के साथ किया था।
स्टालिन मॉस्को की रक्षा में पूरी ताकत लगा देता है, स्टेलिनग्राद की भयंकर लड़ाई जर्मनी हार जाता है, और जर्मनी को पीछे हटना पड़ता है।
रूस की भयानक ठण्ड भी जर्मन्स के लिए कालजयी साबित होती है।
रशिया के साथ युद्ध में अपनी सारी ताकत झोकने की वजह से अन्य क्षेत्रों में जर्मन्स के पांव उखाड़ने लगते हैं, नार्थ अफ्रीका में जर्मनी हर जाता है।
फ्रांस पर मित्र देश हमला कर देते हैं, और 1944 आते-आते वही होता है
दोनों तरफ जर्मनी की हार होने लगती है, एक-एक कर के पूर्वी यूरोप के देश जर्मनी से आजाद होकर रूस के लाल झंडे के नीचे आ जाते हैं।
और 1945 में रेड-आर्मी बर्लिन में प्रवेश कर लेती है।। और जर्मनी के दो टुकड़े हो जाते हैं।
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